चूरू बालिका महाविद्यालय : शैक्षणिक भ्रमण ,5-17 दिसम्बर, 2024

महाविद्यालय की छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण मात्र सैर-सपाटा या मौज-मस्ती नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित होना, देश के विभिन्न अंचलों के लोक-जीवन, इतिहास, परम्परा, वास्तुकला, शिल्प, आस्था और नैसर्गिक सौन्दर्य को निहारना, जानना, आत्मसात करना इसका अभीष्ट होता है। फिर विद्यार्थी जीवन में साथ यात्रा करने, ठहरने, खान-पान और घूमने का आनन्द तो वर्णन से परे होता है। यात्रा के अपने कष्ट हैं, मौसम की भी अपनी चुनौतियाँ होती हैं, तो संसाधन भी सीमित होते हैं- पर इनके माध्यम से ही परस्पर सहयोग, सहकार, समन्वय, आत्मीय भाव, प्रबन्ध-कौशल, जैसे अनगिनत गुण विकसित होते हैं, व्यक्तित्व निखरता है।
इसी विचार-शृंखला में हमारा भ्रमण कार्यक्रम बनता है। इस बार मेवाड़ अंचल के उदयपुर, नाथद्वारा, सांवलिया सेठ आदि स्थानों के भ्रमण का कार्यक्रम बना। यह नवम्बर में तय था पर परिस्थितिवश दिसम्बर का मध्य आ गया, फिर भी मौसम ने लाज रखी। छात्राओं के साथ प्राचार्य सहित स्टाफ भी था। 15 की शाम को बस द्वारा रवाना हुए, माननीय ट्रस्टी श्री मुरली मनोहर जी सराफ और श्रीमती संतोष जी सराफ ने हरी झण्डी दिखाकर विदा दी। इस अवसर पर माननीय अध्यक्ष श्री रामगोपाल जी बहड, सचिव श्री भागीरथ जी शर्मा ने शुभकामनाएं दीं। विदा देने हेतु अन्य स्टाफ सदस्य और अभिभावक भी उपस्थित थे।
बस में नाचते-गाते हुए प्रातः उदयपुर पहुँचे। विश्राम हेतु वहाँ अग्रवाल धर्मशाला में ठहरे। नाम को धर्मशाला परन्तु सुविधा और चार्ज एक अच्छे होटल जैसा। बहुत अच्छी व्यवस्थाएं। श्री मुकेशजी जांगिड़, बस मालिक से अधिक अब परिवार के सदस्य से हो गए हैं। बस, ठहरने और खानपान की उन्होंने उत्तम व्यवस्थायें कीं। इस कारण लम्बी यात्रा भी थकान भरी नहीं लगी। उदयपुर तो कमाल का शहर है, 2-3 दिन तो केवल इसे देखने में ही लग जाएँ, आसपास के सब स्थल देखने हों तो पूरा सप्ताह चाहिए। सिटी पैलेस से सिलसिला शुरू हुआ, फतह सागर, अरावली गार्डन, सहेलियों की बाड़ी जैसे कई स्थल देखे। एक से बढ़ कर एक! इसी बीच, 90 के दशक में महाविद्यालय की प्रतिभावान छात्रा रही, वरिष्ठ आरएएस श्रीमती श्वेता फगेड़िया, जो सम्प्रति राजस्थान राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक हैं, से उनके कार्यालय में आत्मीयता पूर्ण भेंट हुई। उन्होंने कॉलेज के अपने सुनहरे दिन याद किए। इस अवसर पर उन्होंने सबको आग्रहपूर्वक अल्पाहार करवाया। प्राचार्य श्रीमती आशा कोठारी ने अध्ययन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का स्मरण किया। रात्रि में आवास स्थल पर बच्चियों ने अलाव तापने का आनन्द लिया और म्यूजिक पर मस्ती में थिरकती भी रहीं।
अगले दिन प्रसिद्ध नाथद्वारा मन्दिर, विश्वास स्वरूपम् , मण्डफिया में सांवलिया सेठ मंदिर के दर्शन किए। चारों ओर बहुत खूबसूरत परिदृश्य, आस्था और प्रकृति के सौंदर्य का अनुपम तादात्म्य। पूरे यात्राकाल में चाय, अल्पाहार, भोजन की घर जैसी उत्तम व्यवस्था। बीच-बीच में फोटोग्राफी, मार्केटिंग भी, उचित मूल्य, ठगी कहीं नहीं लगी। समय तो मानो दौड़ने लगा हो। भ्रमण, दर्शन, अवलोकन से जी नहीं भरा पर लौटने का समय हो गया। लौटते-लौटते 18 की भोर हो गई। बस में जागते हुए गए, जगराता करते लौटे, पर भ्रमण दल के एक भी सदस्य को थकान नहीं। सब आनन्द से सराबोर, लौटने को मन नहीं कर रहा पर समय पर पक्षी को अपने घौंसले में आना ही होता है। यह ट्रिप अभी पूरी नहीं हुई, उससे पहले ही अगले सत्र के सपने बुने जाने लगे। सब सकुशल घर लौटे तब प्राचार्य को चैन की साँस आई, एक बहुत बड़ा उत्तरदायित्व सफलता से पूरा हुआ। छात्राओं के साथ उनके अभिभावक भी ट्रिप से बहुत खुश हुए। छात्राओं ने कही हुई हर बात की अनुपालना की, सदैव अनुशासन बनाए रखा। ट्रिप की सह प्रभारी श्रीमती कविता पंसारी व श्रीमती विनीता मंगल सहित स्टाफ के सभी सहयात्री सदस्यों ने व्यवस्था बनाने में पूरा सहयोग किया तथा यात्रा व भ्रमण को सार्थक बनाने में पूरा योगदान किया। ट्रिप को यादगार बनाने के लिए सबका स्नेहिल आभार!
इस आनन्ददायी ट्रिप के कुछ चितराम  सादर-